श्रीधर वेम्बु: सिलिकॉन वैली से ग्रामीण भारत तक एक अरबों डॉलर का साम्राज्य
श्रीधर वेम्बु का जीवन एक इंजीनियर की अमेरिका में सफलता पाने की पारंपरिक कहानी नहीं है; यह एक अरबपति का ग्रामीण भारत की मिट्टी से एक वैश्विक प्रौद्योगिकी क्रांति को जन्म देने का असाधारण संकल्प है।
1. मिट्टी का बेटा और शैक्षिक हुंकार
तमिलनाडु के तंजावुर जिले के एक साधारण किसान परिवार में 1968 में जन्मे श्रीधर वेम्बु ने बचपन से ही अकादमिक उत्कृष्टता का परिचय दिया। उनकी शिक्षा की भूख इतनी तीव्र थी कि उन्हें भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान, आईआईटी मद्रास तक ले गई, जहाँ उन्होंने 1989 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। यहीं से उनके सपनों को पंख मिले और वह पीएचडी पूरी करने के लिए अमेरिका की प्रतिष्ठित प्रिंसटन यूनिवर्सिटी पहुँचे।
2. अमेरिका का त्याग और भारत की पुकार
पीएचडी पूरी करने के बाद, वेम्बु ने सैन डिएगो में क्वालकॉम में एक शानदार करियर शुरू किया, जहाँ वह वायरलेस तकनीक के भविष्य को आकार दे रहे थे। लेकिन कॉरपोरेट की सोने की जाली उन्हें बांध नहीं सकी। उनके भीतर एक धधकती इच्छा थी—एक ऐसी भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी बनाने की जो अमेरिकी दिग्गजों को चुनौती दे सके।
- 1996 में, उन्होंने अपने भाई-बहनों और दोस्तों के साथ मिलकर एडवेंटनेट की सह-स्थापना की। यह उद्यम 2009 में एक वैश्विक पहचान बन गया और इसका नाम बदलकर जोहो कॉर्पोरेशन रखा गया।
3. 'मेक इन विलेज' का क्रांतिकारी दर्शन
सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद, वेम्बु ने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री को चौंका दिया—उन्होंने 2019 में सिलिकॉन वैली का आराम छोड़कर तमिलनाडु के छोटे से गाँव तेनकासी को अपना घर और जोहो का केंद्र बना लिया।
- गांव में मुख्यालय (The Village HQ): उन्होंने गाँव में ही एक टेक कैंपस स्थापित किया, यह साबित करते हुए कि विश्व स्तरीय कोड और नवाचार किसी भी शहर के नाम के मोहताज नहीं होते।
- साइकिल पर सीईओ: अरबों डॉलर की कंपनी के मालिक होने के बावजूद, वह आज भी साइकिल पर अपने ऑफिस जाते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समझते हैं।
- शिक्षा का नया मॉडल: उनकी सबसे बड़ी विरासत जोहो स्कूल्स ऑफ़ लर्निंग है, जो बिना औपचारिक कॉलेज डिग्री के ग्रामीण युवाओं को कोडिंग का प्रशिक्षण देती है। यह एक साहसी घोषणा थी कि प्रतिभा प्रमाण-पत्रों से बड़ी होती है।
4. एक आत्मनिर्भर और सम्मानित लीडर
जोहो ने आज तक किसी भी वेंचर कैपिटल (VC) का पैसा नहीं लिया है। बूूटस्ट्रैप्ड (Bootstrapped) होने का यह फैसला जोहो को ₹1 लाख करोड़ से अधिक की वैल्यू वाली एक दुर्लभ, स्वतंत्र कंपनी बनाता है।
श्रीधर वेम्बु की कहानी यह बताती है कि महानता को जन्म देने के लिए बड़े शहरों या बाहरी फंडिंग की नहीं, बल्कि दृष्टि, साहस और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के विश्वास की आवश्यकता होती है। उन्होंने यह दिखा दिया कि एक सच्चा वैश्विक साम्राज्य भारत के गाँवों की मिट्टी से भी खड़ा किया जा सकता है।



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